किसी व्यक्ति विशेष या पार्टी के खिलाफ बोलना राष्ट्र के खिलाफ बोलना नहीं : ठाकुर

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स्टेट प्रेस क्लब, मप्र की दो दिनी मास्टर क्लास ‘खबरों की खबरची’ का समापन
इंदौर। भारतीय मीडिया पिछले कुछ वर्षों से 140 करोड़ लोगों के भारत में सिर्फ पांच सौ-हजार लोगों की कही हुई बातों, उनके कार्यकलापों को दी रिपोर्ट करने में लगा है। किसी व्यक्ति विशेष या पार्टी के खिलाफ बोलना राष्ट्र के खिलाफ बोलना नहीं है। पत्रकारों को इस बनाई गई अवधारणा का मुकाबला करना चाहिए।
ये बातें स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश के अभिनव आयोजन मास्टर क्लास- खबरों के खबरची के विद्वान वक्ता के रूप में देश के वरिष्ठ पत्रकार एवं द टेलीग्राफ के नेशनल अफेयर्स एडिटर संकर्षण ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि भारत और सरकार में फर्क है। सरकारें चुनी जाती है, आती हैं और चली जाती हैं, जबकि राष्ट्र न तो चुन कर आया है और न कहीं जाएगा। ऐसे में किसी व्यक्ति या पार्टी को राष्ट्र से जोडऩा गलत है। ऐसी सोच फैलाने वालों के खिलाफ पत्रकारों को काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि प्रधानमंत्री ने लगभग 10 वर्षों के कार्यकाल में एक बार भी पत्रकार वार्ता नहीं की। देश में यह भी झूठा भ्रम फैलाया जा रहा है कि पूर्व में जो पत्रकार प्रधानमंत्री के साथ विदेश के दौरों पर जाते थे वे करदाताओं के पैसों पर ऐश करते थे, जबकि असलियत यह है कि प्रधानमंत्री के बड़े विमान में बहुत सा स्थान होता है, जिसमें पत्रकार एवं अन्य अधिकारियों के जाने के बाद भी काफी स्थान रिक्त रह जाता है। विदेशों में पत्रकारों के खर्च का वहन उनका अपना संस्थान करता है। पत्रकारों के दमन के लिए पूर्व में भी प्रेस बिल, डिफेनेशनल बिल इत्यादि लाने के असफल प्रयास हुए हैं। पत्रकारों का धर्म है प्रधानमंत्री, सत्ता एवं पार्टियों के अन्य महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों से सवाल करना है। लोकतंत्र में सवाल पूछने से डर कैसा? 
श्री ठाकुर ने कहा कि पत्रकारिता में डेस्क पर काम करने वालों कि भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा उन्हें भी बाइलाइन में स्थान दिया जाना चाहिए। आज पत्रकारिता से ग्रामीण अंचल सहित भारत के बहुत बड़े हिस्से और जनसंख्या की कोई बात नहीं होती। पत्रकार सिर्फ शहरी होकर रह गए हैं। ‘इंडिया इंडिया’, ऐसे ही कुछ अन्य स्लोगनों, फील गुड न्यूज इत्यादि की आड़ में सरकार की कमियों को छुपाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि मुगलों ने राजतंत्र के अन्तर्गत 700 वर्षों तक भारत पर राज किया और उस समय न तो कोई कोर्ट थी और न ही मीडिया। इसके बाद भी उस वक्त जब कम जनसंख्या के बावजूद हिन्दु खतरे में नहीं आया तो अब कैसे आ सकता है। इस प्रकार के भ्रम फैलाने वालों और झूठे मुद्दों से लडऩा मीडिया की जिम्मेदारी है। आज सवाल उठाने वालों को राष्ट्र विरोधी का तमगा देकर पाकिस्तान चले जाने ट्रोलिंग मिलती है, जबकि अन्याय को सहन करना अन्याय करने से भी बड़ा पाप है। श्री ठाकुर ने अफसोस व्यक्त किया कि आज देश में कोई भारतीय के रूप में बात ही नहीं करता। सभी हिन्दु-मुस्लिम, ईसाई या फिर अन्य तरह के वर्गीकरणों में बंट कर बात करते हैं। मरते हुए लोगों पर भी टीआरपी भारी होने लगी है। मीडिया और देश दोनों में ही संवेदनशीलता घटी है। पत्रकारों को देश के नागरिकों को अधिक संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार बनाने के लिए काम करना चाहिए। 
संकर्षण ठाकुर ने कहा कि आज पाठक दृश्य माध्यमों से खबर को पहले ही देख लेता है। ऐसे में  जब तक खबर से जुड़ी अन्य तथ्यों, घटनाओं इत्यादि का विश्लेषण और प्रस्तुतिकरण भी रोचक ढंग से नहीं किया जाएगा, पाठक देखी हुई खबर को पढऩे में रुचि नहीं दिखाएगा। अखबारों में कार्टूनविधा का महत्व भी घटना दु:खद है। कार्टून का पत्रकारिता में महत्वपूर्ण स्थान है। न्यूज यू कैन यू•ा इत्यादि जैसे ट्रेंड्स को उन्होंने पत्रकारिता मानने से इनकार करते हुए कहा कि नए प्रोड्क्ट्स आदि की जानकारी देना विज्ञापनों का काम है पत्रकारों का नहीं। नए पत्रकारों को उन्होंने सलाह दी कि वे अपनी स्किल को लगातार तराशते रहें।

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