
धुलकोट (जनक्रांति न्यूज़) दिलीप बामनिया: बुरहानपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में हर घर नल योजना की पोल खुल रही है. घर घर जल पहुंचाना सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है. अफसरों की लापरवाही और अनदेखी की वजह से इस योजना पर पलीता लग रहा है. बुरहानपुर जिले में 129 करोड़ रुपयों की लागत से 254 गांवों में यह योजना स्वीकृत है। कागजों पर इसे शत- प्रतिशत लागू बता दिया है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर बसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 15 से 20 गांव हैं, जहां पर नल जल योजना की वास्तविकता सामने दिखाई दी, इन गांवों में घर -घर नल -जल योजना पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है।
करोड़ों रुपए की लागत से शुरू की गई नल -जल योजना देख- रेख के अभाव में लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। इसके कारण ग्रामीणों को बूंद -बूंद पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यहां घर- घर नल -जल योजना का काम पूरा हो चुका है और हर घर तक पानी के लिए पाइप बिछ चुकी है, तो कहीं नल लगाए उसमे पानी नहीं आ रहा है। नालों में टोटी नहीं लगाए है और ना ही जल मिल रहा है।
धुलकोट से इस वक्त कि सबसे बड़ी खबर आ रही है जहां पर, धुलकोट क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले ग्राम पंचायत गढतार के इमली वाले दरगाह के पास आदिवासी लोग आसपास निवास कर रहे हैं। ग्रामीण जन नाले में गड्ढे खोदकर पेयजल बैलगाड़ी व सिर पर लेजाकर पिने का पानी पर मजबुर है मगर पंचायत में बैठे सरपंच व सचिव बिल्कुल इस और ध्यान दें रहें हैं। इस जगह पर लगातार कई वर्षों से ग्रीएम काल में पानी का अकाल पडता है लेकिन ग्रामीण जनों कि इस समस्या पर नहीं तो प्रशासन दे ध्यान देती है नहीं ग्राम पंचायत इसी तरह ग्रामीण जनों ने कई बार ग्राम पंचायत में इस समस्या को लेकर सरपंच व सचिव को आवगत कराया मगर फिर भी कुछ नहीं हुआ व लोग आज भी नाले का गंदा व मटमैला पानी पीने पर मजबुर है। और अगर बात करें ग्राम पंचायत गढतार के सरपंच सचिव कि तो वह इस और अपना ध्यान केंद्रित करना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं।






