हाईकोर्ट ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ FIR को अधूरा बताया, दोबारा दर्ज करने का आदेश

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जबलपुर | 15 मई 2025: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के मंत्री विजय शाह के खिलाफ दर्ज की गई FIR को अधूरी और औपचारिकता मात्र करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराएं — धारा 152, 196(1)(b), और 197(1)(c) — जोड़ी जाएं और FIR दोबारा दर्ज की जाए।

यह मामला कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ मंत्री विजय शाह द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयान से जुड़ा है, जिसे अदालत ने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा बताया।

कोर्ट का सख्त रुख: ‘यह सिर्फ भाषण नहीं, देश की एकता पर हमला है’

जस्टिस अतुल श्रीधरन ने स्वतः संज्ञान लेते हुए टिप्पणी की कि मंत्री विजय शाह का बयान भारतीय सेना, महिलाओं और विशेषकर आदिवासी समुदाय का अपमान है।
“यह कोई साधारण राजनीतिक बयान नहीं बल्कि सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास है। संविधान इसकी अनुमति नहीं देता,” कोर्ट ने कहा।

कोर्ट ने कहा कि पहले दर्ज FIR केवल खानापूर्ति थी और इसमें आवश्यक धाराएं ही नहीं थीं, जिससे न्याय प्रक्रिया की गंभीरता पर सवाल उठता है।

सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, भाषा पर जताई नाराज़गी

विजय शाह ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए पूछा,
“आप मंत्री हैं, ऐसी भाषा का उपयोग कैसे कर सकते हैं? संविधान इस तरह की टिप्पणी की अनुमति नहीं देता।”

मामले की पृष्ठभूमि

मंत्री विजय शाह ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से सेना की पूर्व अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी की थी। कोर्ट के कड़े आदेश के बाद देर रात मानपुर थाने में FIR दर्ज की गई, लेकिन उसमें आवश्यक धाराएं नहीं जोड़ी गई थीं।

अब कोर्ट के आदेशानुसार FIR में निम्न धाराएं जोड़ी जाएंगी:

  • BNS 152 – समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास
  • BNS 196(1)(b) – राष्ट्रीय एकता को खतरे में डालने वाली गतिविधियाँ
  • BNS 197(1)(c) – भारतीय सेना का अपमान

राजनीतिक संकट में BJP, आदिवासी नेता को बचाने के आरोप

विजय शाह को मालवा-निमाड़ के बड़े आदिवासी नेता के रूप में देखा जाता है और वे 2003 से हर BJP सरकार में मंत्री रहे हैं। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह आदिवासी वोट बैंक की राजनीति के चलते इस गंभीर मामले को दबा रही है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि अब पुलिस जांच की निगरानी कोर्ट स्वयं करेगा ताकि निष्पक्ष और कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

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