असम के वेस्ट करबी आंगलोंग में बिहारी प्रवासियों पर हिंसा: दर्जनों घर जले, दुकानें लूटीं, दो की मौत, तनाव बरकरार

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असम के वेस्ट करबी आंगलोंग जिले में दिसंबर 2025 के अंत में भूमि अतिक्रमण को लेकर करबी जनजाति और गैर-जनजातीय बसने वालों के बीच हिंसा भड़क उठी। मुख्य रूप से बिहारी और हिंदी भाषी प्रवासियों को निशाना बनाया गया, जिसमें दर्जनों घर जला दिए गए और दुकानों में लूटपाट हुई। इस हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई और 70 से ज्यादा घायल हुए, जिनमें 60 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल हैं। घटना खेरोनी बाजार क्षेत्र में हुई, जो करबी, बिहारी, बंगाली और नेपाली समुदायों का मिश्रित इलाका है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि अदालती आदेश के कारण तत्काल निकासी संभव नहीं, लेकिन विपक्ष ने राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया है। यह घटना छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों में जनजातीय अधिकारों और प्रवासियों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करती है।

पृष्ठभूमि: भूमि अतिक्रमण का पुराना विवाद

करबी आंगलोंग और वेस्ट करबी आंगलोंग जिले छठी अनुसूची के तहत जनजातीय बहुल क्षेत्र हैं, जहां भूमि, राजनीतिक अधिकार और व्यवसाय पर जनजातीय समुदायों का विशेषाधिकार है। करबी समुदाय (असम की कुल जनजातीय आबादी का 11.1%) लंबे समय से गैर-जनजातीय बसने वालों, मुख्य रूप से बिहारी, बंगाली और नेपाली प्रवासियों द्वारा विलेज ग्रेजिंग रिजर्व (VGR) और प्रोफेशनल ग्रेजिंग रिजर्व (PGR) भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत करता रहा है। फरवरी 2024 में करबी आंगलोंग ऑटोनॉमस काउंसिल (KAAC) ने 2,000 से ज्यादा परिवारों (ज्यादातर बिहारी) को निकालने का आदेश दिया, लेकिन गौहाटी हाईकोर्ट ने 300 से ज्यादा परिवारों को अंतरिम राहत दे दी। फरवरी 2025 में हिंदी भाषी समुदायों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बसने वालों के अधिकारों की मांग की, जिससे करबी समुदाय में आक्रोश फैला। राजनीतिक रूप से, 2017 से कोपिली निर्वाचन क्षेत्र से बिहारी बीजेपी नेता पवन कुमार चुने जा रहे हैं, जो तनाव बढ़ा रहा है। सरकारी परियोजनाएं जैसे सोलर प्लांट, पाम ऑयल प्लांटेशन और माइनिंग भी करबी समुदाय को प्रभावित कर रही हैं।

हिंसा का ट्रिगर: हंगर स्ट्राइक और पुलिस कार्रवाई

दिसंबर की शुरुआत में फेलांगपी गांव (खेरोनी से 3 किमी दूर) में नौ करबी कार्यकर्ताओं ने अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हंगर स्ट्राइक शुरू की। 22 दिसंबर की सुबह 3 बजे पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया और मेडिकल जांच के लिए गुवाहाटी ले गई, जिसे करबी समुदाय ने गिरफ्तारी माना। इससे आक्रोश फैला और 23 दिसंबर को हिंसा भड़क गई। करबी भीड़ ने पत्थरबाजी की, KAAC प्रमुख तुलिराम रोंगहांग का पैतृक घर जला दिया और खेरोनी बाजार में गैर-जनजातीय घरों व दुकानों पर हमला किया। पुलिस ने आंसू गैस और रबर बुलेट्स का इस्तेमाल किया, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस पर निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया।

प्रभावित समुदाय और नुकसान: बिहारी प्रवासियों पर निशाना

हिंसा में मुख्य रूप से बिहारी और हिंदी भाषी प्रवासियों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, खेरोनी बाजार में एक दर्जन से ज्यादा गैर-जनजातीय घर जला दिए गए, जबकि सभी गैर-जनजातीय दुकानें जला दी गईं या लूट ली गईं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में करीब 15 दुकानों का जिक्र है। प्रत्यक्षदर्शी कल्पना डे ने बताया कि पुलिस के सामने उनका घर और दुकान जला दी गई, वे कोपिली नदी में कूदकर भागे। विकलांग सुरेश डे (32) अपने घर में जिंदा जल गया, जबकि करबी कार्यकर्ता लिनुस फांगचो (40) पुलिस फायरिंग में मारा गया। 70 से ज्यादा घायल हुए। पीड़ितों ने सब कुछ खो दिया, कई परिवार ट्रकों में सामान लादकर भागे। करबी पक्ष ने कहा कि हिंसा अतिक्रमण के खिलाफ थी, लेकिन यह सांप्रदायिक रंग ले लिया।

नोट: कुछ अपुष्ट रिपोर्ट्स में 300 घर और 40 दुकानों के जलने का दावा है, लेकिन मुख्यधारा मीडिया में यह संख्या दर्जन भर घरों और 15 दुकानों तक सीमित है। यह संभवतः हाईकोर्ट में 300 परिवारों के स्टे ऑर्डर से भ्रम हो सकता है।

सरकारी प्रतिक्रिया और जांच की मांग

हिंसा के बाद इंटरनेट सस्पेंड कर दिया गया, कर्फ्यू लगाया गया और आर्मी, CRPF, RAF की तैनाती की गई। फ्लैग मार्च निकाले गए। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि हाईकोर्ट के स्टे के कारण निकासी नहीं हो सकती। वरिष्ठ मंत्री रनोज पेगू ने बातचीत कर हंगर स्ट्राइक खत्म कराई। विपक्ष (कांग्रेस, CPI(M), रैजोर दल आदि) ने गवर्नर को ज्ञापन देकर न्यायिक जांच, पीड़ितों के पुनर्वास और मुआवजे की मांग की, साथ ही राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया। पुलिस वीडियो फुटेज से हमलावरों की पहचान कर रही है।

प्रभाव और आगे की राह: तनाव में क्रिसमस, चर्चों में सतर्कता

हिंसा के बाद इलाके में अशांति है, लोग सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं लेकिन डर बरकरार है। यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम ने चर्चों को रात के कार्यक्रम सीमित करने की सलाह दी। 300 से ज्यादा चर्च प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना जनजातीय क्षेत्रों में प्रवासन और विकास परियोजनाओं से जुड़े तनाव को दर्शाती है। अगर बातचीत नहीं हुई तो आगे हिंसा बढ़ सकती है।

शांति की जरूरत, न्याय की मांग

यह हिंसा असम में जनजातीय अधिकारों और प्रवासियों के बीच संतुलन की जरूरत बताती है। सरकार को अदालती फैसले का सम्मान करते हुए बातचीत बढ़ानी चाहिए। पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना जरूरी है।

Arshad Khan

Arshad Khan is a digital marketing expert and journalist with over 11 years of freelance experience in the media industry. Before joining MP Jankranti News, he worked with SR Madhya Pradesh News as a freelancer, focusing on digital growth and audience engagement. For the past 6 years, he has been contributing to MP Jankranti News through news coverage, content strategy, and digital outreach. His expertise lies in combining journalism with digital marketing techniques to maximize organic reach and reader engagement.

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