अकोट में एमआईएमआईएम के साथ गठबंधन के संदर्भ में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने विधायक प्रकाश भारसाखले को कारण बताओ नोटिस किया है। पार्टी ने स्थानीय नेता से कहा है कि इससे पार्टी की छवि धूमिल हुई है।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर अप्रत्याशित गठबंधनों का दौर चल रहा है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ‘B’ टीम कहा जाता रहा है, लेकिन अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में यह आरोप अब हकीकत बन गया है। यहां BJP और AIMIM ने खुलेआम हाथ मिलाकर ‘अकोट विकास मंच’ नाम का गठबंधन बनाया और सत्ता पर कब्जा कर लिया। हालांकि, इस गठबंधन पर विवाद छिड़ते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए तुरंत तोड़ने के आदेश दे दिए। यह घटना 6 जनवरी 2026 को हुई, लेकिन 7 जनवरी को फडणवीस के हस्तक्षेप ने पूरे मामले को नया रंग दे दिया।
यह गठबंधन न केवल वैचारिक विरोधाभासों को उजागर करता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर सत्ता हासिल करने की राजनीतिक मजबूरियों को भी सामने लाता है। विपक्षी पार्टियां इसे ‘सुविधानुसार राजनीति’ बता रही हैं, जबकि BJP इसे ‘स्थानीय व्यवस्था’ का नाम दे रही थी। आइए, इसकी पूरी कहानी समझते हैं।
चुनाव परिणाम और गठबंधन का बैकग्राउंड: बहुमत के लिए अप्रत्याशित साथी
अकोट नगर परिषद चुनावों में कुल 33 वार्ड थे (कुछ रिपोर्ट्स में 35 सदस्यीय परिषद का उल्लेख), जहां BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन स्पष्ट बहुमत से चूक गई। BJP को 11 सीटें मिलीं, कांग्रेस को 6, और AIMIM को 5 सीटें। अन्य पार्टियां जैसे एकनाथ शिंदे की शिवसेना, अजीत पवार की NCP और बच्चू काडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी भी मैदान में थीं। बहुमत के लिए BJP को सहयोगियों की जरूरत पड़ी, और 6 जनवरी 2026 को ‘अकोट विकास मंच’ का गठन हुआ।
इस गठबंधन में BJP, AIMIM, शिंदे गुट की शिवसेना, पवार गुट की NCP और प्रहार जनशक्ति पार्टी शामिल हुईं, जिससे कुल 25 पार्षदों का समर्थन मिला। गठबंधन को अकोला जिला प्रशासन के साथ औपचारिक रूप से रजिस्टर कराया गया। BJP की माया धुले को चेयरपर्सन (महापौर) चुना गया। यह पहली बार है जब BJP और AIMIM ने खुले तौर पर सत्ता साझा की है, जो ओवैसी की पार्टी पर लगने वाले ‘B’ टीम के आरोप को ‘A’ टीम में बदल देता है।
इसी तरह, अंबरनाथ नगर परिषद में BJP ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, जो और विवादास्पद रहा। यहां BJP ने कांग्रेस के 12 सदस्यों, NCP के 4 और एक निर्दलीय के साथ ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ बनाई।

नेताओं की प्रतिक्रियाएं: फडणवीस का हस्तक्षेप और विपक्ष का हमला
गठबंधन की खबर फैलते ही विपक्ष ने BJP पर निशाना साधा। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने कहा, “BJP अंबरनाथ में कांग्रेस के साथ और अकोट में AIMIM के साथ गठबंधन कर रही है। यह वही पार्टी है जो कांग्रेस-मुक्त भारत की बात करती थी।” कांग्रेस ने अंबरनाथ में अपने स्थानीय प्रमुख प्रदीप पाटिल और समिति को निलंबित कर दिया, और कहा कि कोई आधिकारिक गठबंधन नहीं था।
BJP ने शुरू में इसे ‘स्थानीय स्तर पर स्थिर शासन सुनिश्चित करने की व्यवस्था’ बताया। लेकिन 7 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने BJP को कांग्रेस और AIMIM के साथ गठबंधनों से तुरंत बाहर निकलने के आदेश दिए, कहा कि ऐसे गठबंधन ‘अस्वीकार्य’ हैं और उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। फडणवीस का यह फैसला पार्टी की राष्ट्रीय छवि को बचाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
AIMIM की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन ओवैसी ने पहले ऐसे आरोपों को खारिज किया है।
प्रभाव और आगे की राह: वैचारिक समझौते पर सवाल
यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति में वैचारिक लचीलापन दिखाती है, जहां सत्ता के लिए पार्टियां अपने सिद्धांतों से समझौता कर रही हैं। AIMIM, जो मुस्लिम हितों की बात करती है, और BJP, जो हिंदुत्व पर जोर देती है, का गठबंधन विरोधाभासी लगता है। विपक्ष इसे ‘वोट बैंक की राजनीति’ बता रहा है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय चुनावों में ऐसे गठबंधन आम हैं लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर असर डाल सकते हैं।
फडणवीस के आदेश के बाद गठबंधन टूटने की संभावना है, लेकिन अकोट में वोटिंग 13 जनवरी को होनी है। कांग्रेस और प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी विपक्ष में रहेंगी। सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग इसे ‘राजनीतिक अवसरवाद’ बता रहे हैं।
महाराष्ट्र के नागरिक चुनावों में यह गठबंधन हमें याद दिलाता है कि राजनीति में सिद्धांत से ज्यादा सत्ता महत्वपूर्ण हो सकती है। फडणवीस के हस्तक्षेप से BJP अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है, लेकिन क्या ऐसे गठबंधन भविष्य में रुकेंगे? समय बताएगा।

महाराष्ट्र में BJP-कांग्रेस का ‘अभद्र गठबंधन’: अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता के लिए हाथ मिलाया, कांग्रेस ने 12 पार्षदों को सस्पेंड किया, फडणवीस ने तोड़ने के दिए आदेश
महाराष्ट्र राजनीति में अप्रत्याशित मोड़—BJP और कांग्रेस का स्थानीय गठबंधन
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर वैचारिक विरोधाभासों को दरकिनार कर सत्ता हासिल करने का खेल देखने को मिला। थाने जिले के अंबरनाथ नगर परिषद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने हाथ मिलाकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ नाम से गठबंधन बनाया, जिसका मकसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के शिवसेना गुट को सत्ता से दूर रखना था। हालांकि, इस गठबंधन ने दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व को असहज कर दिया। कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों और ब्लॉक कार्यकारिणी को निलंबित कर दिया, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए तुरंत तोड़ने के आदेश जारी किए। यह घटना 7 जनवरी 2026 तक की है, जो स्थानीय चुनावों में राष्ट्रीय वैचारिक मतभेदों को चुनौती देती है।
यह गठबंधन न केवल शिंदे शिवसेना के गढ़ में हुआ, जहां से शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे सांसद हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर BJP की ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ की बात को भी कटघरे में खड़ा करता है। आइए, इसकी पूरी पृष्ठभूमि और प्रतिक्रियाओं पर नजर डालें।
चुनाव परिणाम और गठबंधन का बैकग्राउंड: शिंदे शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने की रणनीति
अंबरनाथ नगर परिषद के हालिया चुनावों में कुल 60 सीटों पर नतीजे इस प्रकार आए: शिवसेना (शिंदे गुट) को 27 सीटें मिलीं, जो सबसे अधिक थीं, लेकिन बहुमत से चूक गईं। BJP को 14, कांग्रेस को 12, NCP (अजीत पवार गुट) को 4 और निर्दलीयों को 2 सीटें मिलीं। शिवसेना को उम्मीद थी कि BJP उसके साथ गठबंधन करेगी, लेकिन BJP ने कांग्रेस, NCP और निर्दलीयों के साथ ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ बनाकर सत्ता हासिल कर ली। इस गठबंधन के तहत BJP की एक उम्मीदवार को नगराध्यक्ष (चेयरपर्सन) चुना गया।
यह गठबंधन मुंबई से करीब 70 किलोमीटर दूर अंबरनाथ में हुआ, जो शिंदे शिवसेना का मजबूत गढ़ माना जाता है। स्थानीय स्तर पर यह फैसला विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के नाम पर लिया गया, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह वैचारिक विरोधाभास का प्रतीक बन गया। इसी तरह, अकोला के अकोट नगर परिषद में BJP ने AIMIM के साथ गठबंधन किया, जो और विवादास्पद रहा।
कांग्रेस की कार्रवाई: 12 पार्षदों का निलंबन और ब्लॉक कार्यकारिणी की बर्खास्तगी
कांग्रेस ने इस गठबंधन को पार्टी लाइन के खिलाफ बताते हुए सख्त कदम उठाया। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि किसी भी स्तर पर BJP के साथ गठबंधन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को पार्टी से निलंबित कर दिया और अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कार्यकारिणी को भंग कर दिया। ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को भी सस्पेंड किया गया। सपकाल ने चेतावनी दी कि ऐसे नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने कहा, “यह कांग्रेस का आधिकारिक गठबंधन नहीं था। स्थानीय नेता ने अपनी मर्जी से यह कदम उठाया, जिसके लिए कार्रवाई की गई है।”
BJP और शिवसेना की प्रतिक्रियाएं: फडणवीस का हस्तक्षेप, शिंदे गुट में नाराजगी
BJP की ओर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन ‘अस्वीकार्य’ है और स्थानीय स्तर पर लिए गए इस फैसले को सुधारा जाएगा। फडणवीस ने पार्टी इकाइयों को चेतावनी दी कि ऐसे गठबंधनों का उल्लंघन अनुशासनात्मक कार्रवाई को आमंत्रित करेगा। BJP उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने सफाई देते हुए कहा कि शिंदे गुट से कई बार गठबंधन पर चर्चा की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने शिंदे गुट पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
शिवसेना (शिंदे गुट) में इस गठबंधन से भारी नाराजगी है। विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने इसे ‘अभद्र गठबंधन’ बताया और कहा कि ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ की बात करने वाली BJP अब कांग्रेस के साथ मिलकर शिवसेना पर हमला कर रही है। सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा, “यह सवाल BJP के लिए है। हमारे गठबंधन अटूट रहने चाहिए। शिवसेना विकास की राजनीति करने वालों के साथ रहेगी।”
यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति में स्थानीय स्तर पर सत्ता के लिए वैचारिक समझौतों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे गठबंधन राष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन स्थानीय चुनावों में आम हैं। सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग इसे ‘राजनीतिक अवसरवाद’ बता रहे हैं। फडणवीस के हस्तक्षेप के बाद गठबंधन टूटने की संभावना है, लेकिन शिवसेना में असंतोष बरकरार रह सकता है।





