खंडवा मध्य प्रदेश जल संरक्षण घोटाले में नया मोड़: IAS अधिकारी पर AI से फर्जी तस्वीरें बनाकर राष्ट्रपति पुरस्कार हासिल करने का सनसनीखेज आरोप

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भारत की नौकरशाही में एक नया विवाद ने तूल पकड़ लिया है। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के IAS अधिकारियों पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का दुरुपयोग करके फर्जी तस्वीरें और डेटा तैयार किया, जिसके आधार पर उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया। यह मामला ‘जल संचय, जन भागीदारी (JSJB)’ योजना से जुड़ा है, जो जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है।

कांग्रेस पार्टी ने इसे ‘स्मार्ट भ्रष्टाचार’ करार देते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, जबकि जिला प्रशासन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। RTI के जवाब में सामने आई AI-जनरेटेड तस्वीरों में वॉटरमार्क्स ने पूरे मामले को और रहस्यमयी बना दिया है। क्या यह तकनीकी गलती है या जानबूझकर धोखाधड़ी? आइए, इसकी गहराई में उतरें।

योजना का बैकग्राउंड: लाखों कुएं-तालाबों का दावा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और

केंद्र सरकार की ‘जल संचय, जन भागीदारी’ योजना के तहत ग्रामीण स्तर पर तालाबों, कुओं और चेकडैम का निर्माण कर जल संरक्षण को प्रोत्साहित किया जाता है। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले ने 2024-25 में इस योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन का दावा किया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) नागार्जुन बी गौड़ा और कलेक्टर रिषभ गुप्ता के नेतृत्व में कथित तौर पर 1.29 लाख से अधिक संरचनाएं बनाई गईं, जिनमें हजारों कुएं और तालाब शामिल थे।

इस ‘उत्कृष्ट कार्य’ के लिए खंडवा जिले को राष्ट्रीय जल पुरस्कार (National Water Award) से सम्मानित किया गया, जो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान किया जाता है। सरकारी दस्तावेजों में दावा किया गया कि गौड़ा और उनकी टीम ने दिन-रात मेहनत कर जिले को जल आत्मनिर्भर बनाया। लेकिन ग्रामीणों की शिकायतों ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए।

ग्रामीणों ने जमीनी स्तर पर इन संरचनाओं की तलाश की, लेकिन कहीं भी उनके निशान नहीं मिले। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हमने सैकड़ों गांवों का दौरा किया, लेकिन न कुआं दिखा, न तालाब। यह सब कागजों पर ही था।”

RTI का धमाका: AI वॉटरमार्क्स ने खोला राज

विवाद तब भड़का जब एक RTI आवेदन दाखिल किया गया। आवेदन में सवाल उठाया गया कि यदि जमीनी स्तर पर संरचनाएं मौजूद ही नहीं हैं, तो पुरस्कार किस आधार पर दिया गया? RTI के जवाब में जल संसाधन विभाग ने सभी दस्तावेज और फोटोग्राफिक सबूत उपलब्ध कराए।

यहीं पर मामला चौंकाने वाला मोड़ ले चुका। जांच में पाया गया कि प्रस्तुत तस्वीरों में Google Gemini जैसे AI टूल्स के वॉटरमार्क्स मौजूद थे, जो साफ बता रहे थे कि ये तस्वीरें कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न की गईं। आरोप है कि अधिकारियों की टीम ने वास्तविक निर्माण के बजाय AI ऐप्स का सहारा लिया और फर्जी इमेजेस को आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड कर दिया। पुरस्कार प्राप्ति की जल्दबाजी में वॉटरमार्क हटाना भूल गए, जिससे पूरा घोटाला उजागर हो गया।

RTI कार्यकर्ता ने कहा, “यह न केवल धोखाधड़ी है, बल्कि सरकारी संसाधनों का अपव्यय भी। लाखों रुपये खर्च कर फर्जी डेटा बनाया गया।”

दोनों पक्षों की दलीलें: कांग्रेस vs प्रशासन

कांग्रेस का आरोप: प्रदेश कांग्रेस ने इसे ‘AI से प्रेरित भ्रष्टाचार’ बताते हुए कहा कि यह योजना की सफलता को धूमिल करने वाला कदम है। नेता ने मांग की कि राष्ट्रपति पुरस्कार रद्द किया जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, “अगर AI से फोटो बनाकर पुरस्कार जीत सकते हैं, तो असली विकास की क्या जरूरत?”

प्रशासन का बचाव: IAS अधिकारी नागार्जुन गौड़ा ने आरोपों को ‘तकनीकी भ्रम’ करार दिया। उन्होंने कहा कि AI-जनरेटेड इमेजेस का पुरस्कार से कोई लेना-देना नहीं है। असल में, ये तस्वीरें जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के लॉगिन से अपलोड की गईं, जो शिक्षकों द्वारा जल संचय अभियान के लिए इस्तेमाल की गईं। DEO को नोटिस जारी कर दिया गया है। कलेक्टर रिषभ गुप्ता ने भी स्पष्ट किया कि वास्तविक डेटा सही है और जांच चल रही है।

प्रभाव और आगे की राह: कोर्ट में जांच का इंतजार

यह मामला न केवल जल संरक्षण योजना पर सवाल खड़े करता है, बल्कि AI के सरकारी इस्तेमाल पर भी बहस छेड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI टूल्स का दुरुपयोग विकास कार्यों में पारदर्शिता को कमजोर कर सकता है। फिलहाल, मामला कोर्ट में पहुंच चुका है, जहां विस्तृत जांच होगी।

सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल हो चुकी है, जहां लोग इसे ‘AI युग का पहला सरकारी घोटाला’ बता रहे हैं। रेडिट और X (पूर्व ट्विटर) पर चर्चाएं तेज हैं, जिसमें UPSC एस्पिरेंट्स भी इसे नौकरशाही की विश्वसनीयता पर सवाल मान रहे हैं।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि तकनीक का सही उपयोग विकास का साधन है, लेकिन गलत हाथों में यह धोखे का हथियार बन सकती है। सरकार को AI इस्तेमाल पर सख्त गाइडलाइंस बनाने की जरूरत है। क्या यह मामला नौकरशाही में सुधार लाएगा? समय ही बताएगा।

Arshad Khan

Arshad Khan is a digital marketing expert and journalist with over 11 years of freelance experience in the media industry. Before joining MP Jankranti News, he worked with SR Madhya Pradesh News as a freelancer, focusing on digital growth and audience engagement. For the past 6 years, he has been contributing to MP Jankranti News through news coverage, content strategy, and digital outreach. His expertise lies in combining journalism with digital marketing techniques to maximize organic reach and reader engagement.

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