पश्चिम बंगाल के बाहर काम करने वाले बंगाली भाषी नागरिकों को ‘बांग्लादेशी’ बताकर परेशान किए जाने की घटनाएं अब और गंभीर रूप लेती जा रही हैं। एक चौंकाने वाले मामले में ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले के एक ओडिया-बंगाली परिवार के 14 सदस्यों को कथित तौर पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा दिसंबर 2025 में बांग्लादेश की ओर धकेल दिया गया। परिवार के सदस्य कई हफ्तों से लापता बताए जा रहे हैं, जबकि वे सभी भारतीय नागरिक हैं और उनके पास आधार कार्ड, वोटर आईडी, जन्म प्रमाण पत्र और जमीन के दस्तावेज मौजूद हैं।
परिजनों के अनुसार, यह घटना 26 दिसंबर 2025 की रात पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के गेदे बॉर्डर पर हुई, जब घने कोहरे का फायदा उठाकर 14 लोगों को सीमा पार कराकर ‘नो मैन लैंड’ में छोड़ दिया गया।
दो साल के बच्चे से लेकर 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला तक शामिल
परिवार के जिन 14 सदस्यों को कथित तौर पर बांग्लादेश धकेला गया, उनमें चार बच्चे, पांच महिलाएं और पांच पुरुष शामिल हैं। इनमें गुलशन बीबी (90), शेख जब्बार (70) और उनके चार बेटे—शेख हकीम (45), शेख उकील (40), शेख राजा (38) और शेख बंटी (28) शामिल हैं। इसके अलावा शेख उकील की 11 वर्षीय बेटी शकीला खातून, शेख राजा के तीन बच्चे—12 वर्षीय नसरीन परवीन, 11 वर्षीय शेख तौहीद और 2 वर्षीय शेख राहिद—तथा अलकुम बीबी (65), समसेरी बीबी (40), साबेरा बीबी (35) और मेहरून्निसा बीबी (25) भी इस समूह में हैं।
सभी लोग ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले के एरसामा थाना अंतर्गत अंबिका गांव के निवासी बताए जा रहे हैं।
वैध दस्तावेजों के बावजूद ‘बांग्लादेशी’ करार
परिजनों का कहना है कि शेख जब्बार और उनका परिवार दशकों से ओडिशा में रह रहा है और वहां के पंजीकृत मतदाता हैं। परिवार के कई सदस्यों का जन्म ओडिशा में हुआ है। उनके पास आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और पुराने भूमि दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद उन्हें ‘बांग्लादेशी’ करार दिया गया।
परिवार का आरोप है कि 8 दिसंबर को स्थानीय पुलिस ने उनके घरों में तोड़फोड़ की और सभी 14 सदस्यों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद कई हफ्तों तक उन्हें अलग-अलग स्थानों पर रोके रखा गया। एक रिश्तेदार ने eNewsroom को बताया कि करीब डेढ़ महीने तक उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि परिवार को कहां रखा गया है।
मीडिया रिपोर्ट से पता चला ‘पुशबैक’
परिवार के एक अन्य सदस्य शेख अकरम ने बताया,
“हमें बाद में मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला कि 26 दिसंबर की शाम उन्हें गेदे बॉर्डर से बांग्लादेश की ओर धकेल दिया गया। यह ओडिशा प्रशासन और BSF की ओर से अवैध कार्रवाई है।”
परिजनों का कहना है कि शेख जब्बार के पूर्वज करीब 70 साल पहले पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के नामखाना इलाके से ओडिशा काम की तलाश में गए थे। आज भी परिवार के नाम पर वहां जमीन दर्ज है।
बांग्लादेश ने भी किया ‘पुशबैक’ से इनकार
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की 6वीं बटालियन, चुआडांगा के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल एम.डी. नजमुल हसन ने इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि 26 दिसंबर की रात BSF ने 14 भारतीय नागरिकों—जिनमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं—को बांग्लादेश में घुसाने की कोशिश की।
उनके अनुसार, सभी 14 लोग बांग्लादेशी नहीं हैं और बांग्लादेश में उनका कोई रिश्तेदार नहीं है। BGB ने इस घटना पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है और वरिष्ठ स्तर पर BSF से बातचीत हुई है। बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उन्हें वापस भारत भेजा जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और कानूनी कार्रवाई की तैयारी
इस मामले पर पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों के खिलाफ कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है।
मानवाधिकार संगठन इंडियन जस्टिस फोरम ने इसे संविधान का घोर उल्लंघन बताया है। संगठन के अध्यक्ष और अधिवक्ता असफाक अहमद ने कहा,
“केवल भाषा और धर्म के आधार पर भारतीय नागरिकों को दूसरे देश में धकेलना अमानवीय है। यह सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है। यदि कार्रवाई नहीं हुई तो हम ओडिशा हाईकोर्ट का रुख करेंगे।”
इस मामले पर BSF से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
Byline: किब्रिया अंसारी
Source: eNewsroom

WB कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने राहुल गांधी को लिखा पत्र
पश्चिम बंगाल के बाहर रह रहे बंगाली भाषी लोगों के कथित उत्पीड़न का मामला अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (WBPCC) के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर ओडिशा और देश के अन्य हिस्सों में बंगाली भाषी लोगों के साथ हो रही कथित घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है।
पत्र में शुभंकर सरकार ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासित राज्यों में विशेष रूप से बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों और नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि न तो केंद्र सरकार और न ही पश्चिम बंगाल राज्य सरकार, संबंधित राज्यों पर ऐसे मामलों को रोकने के लिए कोई ठोस दबाव बना रही है।
ओडिशा की 14 सदस्यीय परिवार का मामला पत्र में शामिल
शुभंकर सरकार ने पत्र में हालिया उस घटना का उल्लेख किया है, जिसमें ओडिशा में रह रहे एक बंगाली भाषी परिवार के 14 सदस्यों को कथित तौर पर ‘बांग्लादेशी’ बताकर राज्य छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। पत्र के अनुसार, यह परिवार मूल रूप से पश्चिम बंगाल का निवासी है और करीब 30 वर्षों से ओडिशा में रह रहा था, इसके बावजूद उन्हें गलत पहचान के आधार पर परेशान किया गया।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल के महीनों में ओडिशा में बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों पर हमलों की संख्या बढ़ी है। एक अन्य घटना में, बंगाली भाषी प्रवासी मजदूर ज्वेल राणा की संबलपुर (ओडिशा) में कथित तौर पर पिटाई के बाद मौत हो गई, जब स्थानीय लोगों ने उन्हें बांग्लादेशी बताकर निशाना बनाया। इस घटना में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
अन्य राज्यों में भी ऐसी घटनाओं का दावा
पत्र में कहा गया है कि इसी तरह की घटनाएं असम, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से भी सामने आई हैं। शुभंकर सरकार ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में बंगाली भाषी भारतीय नागरिकों को जबरन बांग्लादेश सीमा की ओर ले जाया गया, लेकिन पड़ोसी देश द्वारा स्वीकार न किए जाने के बाद वे परिवार सर्दी के मौसम में असहाय स्थिति में फंसे रहे।
केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
शुभंकर सरकार ने राहुल गांधी से अपील की है कि वे इस मुद्दे को सरकार के उच्चतम स्तर पर उठाएं और ओडिशा सहित संबंधित राज्यों पर दबाव बनाएं, ताकि बंगाली भाषी नागरिकों के खिलाफ हो रही कथित ज्यादतियों को रोका जा सके।
पत्र के अंत में उन्होंने लिखा है कि लोकतंत्र और मानवता के मूल्यों की रक्षा के लिए इस समय विपक्षी नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।





