MP Jankranti News डेस्क रीवा, मध्यप्रदेश रीवा ज़िले के थाना रायपुर कर्चुलियान अंतर्गत ग्राम चौड़ियार, वार्ड क्रमांक 11 से जुड़ा एक मामला इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ज़िला पंचायत सदस्य प्रकाश मिश्रा उर्फ लल्लन और ग्राम निवासी युवक मनीष मिश्रा के बीच आरोप–प्रत्यारोप सामने आए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
युवक द्वारा लगाए जा रहे आरोप और दूसरे पक्ष से जुड़ी जानकारियों ने इस पूरे घटनाक्रम को सोशल मीडिया से लेकर ज़मीनी हकीकत तक चर्चा में ला दिया है।
सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोप
ग्राम चौड़ियार निवासी युवक मनीष मिश्रा बीते कुछ समय से सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो और पोस्ट साझा कर रहा है। इन वीडियो में वह ज़िला पंचायत सदस्य प्रकाश मिश्रा पर मारपीट और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाता दिखाई देता है।
मनीष मिश्रा का कहना है कि उसके साथ मारपीट की गई, जिसकी शिकायत उसने पुलिस थाने में दर्ज कराई है, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसी बात को लेकर वह सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात सार्वजनिक कर रहा है।
मनरेगा भुगतान को लेकर दावा
MP Jankranti News टीम से बातचीत में मनीष मिश्रा ने दावा किया कि मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी पहले उसके खाते में डलवाई जाती थी और बाद में उससे निकलवा ली जाती थी। युवक का कहना है कि उसके पास इस संबंध में सबूत मौजूद हैं।
उसका यह भी आरोप है कि क्षेत्र में भ्रष्टाचार फैला हुआ है और जो भी इसके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है, उसे दबा दिया जाता है। हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल मनीष मिश्रा के व्यक्तिगत बयानों पर आधारित हैं, जिनकी पुष्टि जांच के बाद ही संभव है।
आरोपी पक्ष से संपर्क की कोशिश
इस पूरे मामले में MP Jankranti News की टीम ने ज़िला पंचायत सदस्य प्रकाश मिश्रा से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
स्थानीय जानकारों का पक्ष
प्रकाश मिश्रा से जुड़े लोगों और स्थानीय जानकारों ने मामले को अलग दृष्टिकोण से बताया है। उनके अनुसार, कुछ समय पहले युवक के घर चोरी की घटना हुई थी, उस दौरान प्रकाश मिश्रा ने मानवीय आधार पर ₹5000 की आर्थिक सहायता दी थी।
स्थानीय जानकारों का सवाल है कि जो व्यक्ति पहले मदद कर चुका हो, वह जानबूझकर मारपीट या शोषण क्यों करेगा। उनका यह भी कहना है कि जिस दिन विवाद हुआ, उस दिन प्रकाश मिश्रा रीवा से अपने घर लौट रहे थे, तभी युवक द्वारा उनकी कार से टकराने की घटना हुई। बाद में युवक ने बाइक खड़ी कर कथित तौर पर गाली-गलौज की, जिससे विवाद बढ़ गया।
स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि उस समय युवक नशे की हालत में था, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि किसी रिपोर्ट में नहीं हुई है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में एक ओर युवक मनीष मिश्रा के मारपीट, मनरेगा भुगतान और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप हैं, तो दूसरी ओर ज़िला पंचायत सदस्य से जुड़े लोगों और स्थानीय जानकारों द्वारा प्रस्तुत पक्ष।
वास्तविक सच्चाई पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट, बैंक रिकॉर्ड, मनरेगा दस्तावेज़ और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
निष्पक्ष जांच की आवश्यकता
यह मामला केवल दो व्यक्तियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि जनहित, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। आवश्यक है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने लाए और दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे।
कानून के तहत न तो किसी को बिना जांच दोषी ठहराया जा सकता है और न ही किसी शिकायत को अनदेखा किया जाना चाहिए।





