सिरोंज। मनरेगा बचाओ मोर्चा (भारत) के तत्वावधान में सोमवार को सिरोंज अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति महोदया द्रौपदी मुर्मु, भारत सरकार नई दिल्ली को एक ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव विनोद सेन के नेतृत्व में दिनांक 29 दिसंबर 2025 को दिया गया, जिसमें Viksit Bharat—Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) VB-G RAM G कानून, 2025 को वापस लेने तथा मनरेगा को पुनः उसके मूल स्वरूप में लागू करने की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि देशभर के मनरेगा मजदूर, श्रमिक संगठन और ग्रामीण नागरिक Viksit Bharat—Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) VB-G RAM G कानून, 2025 का कड़ा विरोध कर रहे हैं। वक्ताओं ने बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 एक कानूनी, मांग-आधारित और विकेंद्रीकृत अधिकार है, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और भूमिहीन मजदूरों को आजीविका की सुरक्षा प्रदान की है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि नया Viksit Bharat—Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) VB-G RAM G कानून मनरेगा के अधिकार-आधारित स्वरूप को समाप्त कर इसे बजट-नियंत्रित योजना में बदल देता है। इसके तहत काम, बजट और प्राथमिकताएं केंद्र सरकार द्वारा तय की जाएंगी, जिससे “पहले बजट, फिर काम” की व्यवस्था लागू होगी। यह व्यवस्था मनरेगा की मूल भावना और आत्मा पर सीधा प्रहार है।
श्रमिक संगठनों का कहना है कि 60:40 लागत-साझेदारी व्यवस्था से राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिससे गरीब राज्यों में रोजगार कार्य ठप हो सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और पलायन बढ़ने की आशंका है। साथ ही कृषि मौसम में 60 दिनों तक काम पर रोक और बायोमेट्रिक व डिजिटल नियंत्रण को मजदूरों के अधिकारों के खिलाफ बताया गया है। वक्ताओं ने कहा कि इससे 73वें संविधान संशोधन के तहत स्थानीय स्वशासन प्रणाली भी कमजोर होगी।
ज्ञापन में यह भी आपत्ति जताई गई कि यह विधेयक मजदूरों, ग्राम सभाओं और श्रमिक संगठनों से बिना किसी परामर्श के लाया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि न तो कानून का नाम बदला जाना चाहिए और न ही मजदूरों के मौलिक अधिकारों से समझौता किया जा सकता है।
प्रमुख मांगें
ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से निम्न मांगें की गईं:
- VB-G RAM G बिल, 2025 को तत्काल वापस लिया जाए।
- मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में पूरी तरह पुनः लागू किया जाए।
- मनरेगा में काम के दिनों की संख्या बढ़ाई जाए तथा न्यूनतम मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की जाए।
इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुरेश यादव, केसर खान, कल्याण सिंह यादव, बुंदेल सिंह कुशवाह, वसीम खान, सरपंच सादिक कुरैशी, बाहव खान, यूनिश कुरैशी सहित बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर, श्रमिक संगठन के प्रतिनिधि एवं ग्रामीण नागरिक उपस्थित रहे।





