📍 भोपाल/सीहोर | MP जनक्रांति न्यूज़
सीहोर स्थित VIT यूनिवर्सिटी, भोपाल में पीलिया (जॉन्डिस) के बढ़ते मामलों को लेकर छात्रों का आक्रोश मंगलवार देर रात हिंसा में बदल गया। हजारों छात्र कैंपस में खराब स्वच्छता व्यवस्था और दूषित पानी को इस बीमारी का कारण बता रहे हैं, जबकि यूनिवर्सिटी प्रबंधन इन आरोपों से इनकार कर रहा है।
प्रदर्शन के दौरान करीब चार हजार छात्रों की भीड़ जमा हो गई। कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया और चांसलर बंगले सहित विश्वविद्यालय की संपत्ति को क्षति पहुंचाई गई।
प्रशासन ने हालात बिगड़ते देख 8 दिसंबर तक कैंपस बंद करने और 4 दिसंबर से होने वाली परीक्षाएं स्थगित करने का आदेश जारी किया।

क्या है विवाद — छात्रों की गंभीर शिकायतें
पिछले कुछ हफ्तों में दो दर्जन से अधिक छात्रों में पीलिया जैसे लक्षण मिलने के बाद विरोध शुरू हुआ।
छात्रों का आरोप—
- कैंपस का पानी दूषित, पीने योग्य नहीं
- गंदगी, खराब स्वच्छता प्रबंधन
- हॉस्टल वार्डन और स्टाफ द्वारा दुर्व्यवहार
- शिकायतें दबाना और छात्रों को धमकाना
- कई छात्रों की तबियत बिगड़ने के बाद भी कार्रवाई न होना
एक छात्र ने कहा—
“मिनरल वाटर खरीदकर पीना पड़ रहा है। स्टाफ शिकायत करने पर गाली देता है, धमकाता है। हालात बहुत खराब हैं।”

यूनिवर्सिटी का दावा — “मौत की खबरें झूठी”
VIT भोपाल ने ‘छात्रों की मौत’ जैसी बातों को पूरी तरह भ्रामक बताया।
रजिस्ट्रार के.के. नायर ने कहा—
“किसी भी छात्र की पीलिया से मौत नहीं हुई। कुछ छात्रों में लक्षण मिले हैं, सभी को उपचार मिल रहा है। खाने-पानी के सैंपल सामान्य पाए गए हैं। ये सिर्फ अफवाहें हैं।”
जिला प्रशासन भी मौत के दावों से सहमत नहीं है।
पुलिस की कार्रवाई — वार्डन सहित 5 कर्मचारियों पर FIR
प्रदर्शन के दौरान वायरल हुए एक वीडियो में हॉस्टल वार्डन प्रशांत पांडे और अन्य कर्मचारियों को छात्रों से मारपीट करते देखा गया।
वीडियो की जांच के आधार पर पुलिस ने निम्न धाराओं में FIR दर्ज की—
- धारा 190
- धारा 191(2)
- धारा 296A
- धारा 115(2)
- धारा 351(3)
DSP (आष्टा) आकाश अमलकर ने बताया—
“वीडियो की पुष्टि के बाद FIR दर्ज कर ली है। जांच जारी है।”
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कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात
प्रशासन ने कैंपस को खाली करवाना शुरू कर दिया है।
DSP दीपक शुक्ला ने कहा—
“स्थिति अभी नियंत्रण में है। 30 नवंबर तक कैंपस बंद रहेगा। बीमार छात्रों की सूची बनाकर उपचार की व्यवस्था की जा रही है।”
मध्य प्रदेश प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ रेगुलेटरी कमीशन ने 3 सदस्यीय समिति गठित कर 3 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
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