बीजेपी सांसद नागेंद्र रॉय का बम फूटा: पीएम मोदी, राष्ट्रपति मुरमू और बंगाल गवर्नर को ‘पाकिस्तानी-बांग्लादेशी’ बता दिया, SIR के खिलाफ खुली बगावत
मध्य प्रदेश जनक्रांति न्यूज डेस्क कोलकाता, पश्चिम बंगाल – 31 दिसंबर, 2025
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों ऐसा धमाका हुआ है कि सबकी बोलती बंद हो गई। बीजेपी के राज्यसभा सांसद नागेंद्र रॉय, जिन्हें अनंत महाराज कहकर बुलाया जाता है, ने एक रैली में भारत के टॉप नेताओं पर ऐसी बातें कहीं कि सुनकर कान खड़े हो गए। 28 दिसंबर को कूचबिहार के सिताई में हुई इस सभा में उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू और राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस को ‘पाकिस्तानी’ और ‘बांग्लादेशी’ बता डाला। ये सब चल रहे SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मतदाता लिस्ट के बहाने कहा गया। इससे मतदाताओं को नाम कटवाने, नागरिकता की जांच और बीजेपी के अंदरूनी झगड़ों पर फिर से बहस छिड़ गई। आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले ये बीजेपी के लिए मुसीबत बन गया है।
वो भाषण जो पार्टी को हिला गया
माटुआ समुदाय के सैकड़ों समर्थकों वाली इस रैली का इरादा SIR के खिलाफ लोगों को इकट्ठा करना था, लेकिन बात जल्दी ही तूफान बन गई। रॉय ने जोर-जोर से चिल्लाया, “राष्ट्रपति पाकिस्तानी हैं, बांग्लादेशी। पीएम बांग्लादेशी हैं, पाकिस्तानी। गवर्नर भी बांग्लादेशी!” ये बातें कई लोगों ने सुनीं और वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गए। उन्होंने SIR से डराने वाली बातें भी कही – नाम कट गए तो बैंक अकाउंट बंद, सरकारी मदद रुकेगी, और डिटेंशन कैंप बनेंगे जहां हरेक की जड़ें खंगाली जाएंगी। “ये काम चला रहे लोग खुद बाहरी हैं,” उन्होंने कहा।
वीडियो इंस्टाग्राम और एक्स पर तेजी से वायरल हो गए। रॉय, जो माटुआ लोगों की CAA से नागरिकता की लड़ाई लड़ते हैं, ने इसे असली भारतीयों को बचाने की कोशिश बताया। मतदाता लिस्ट साफ करने के नाम पर ये ‘बाहरी साजिश’ है, उनका कहना था।

SIR क्या बला है? बंगाल की राजनीति का आग का गोला
सबका गुस्सा SIR पर टूटा है। ये चुनाव आयोग का जून 2025 से चल रहा घर-घर जाकर लिस्ट चेक करने का काम है, पहले बिहार में शुरू हुआ, अब बंगाल में भी। नामों की जांच, डुप्लिकेट हटाना – ये तो ठीक, लेकिन विवादों ने घेर लिया।
ममता बनर्जी की टीएमसी इसे ‘पीछे से NRC लाने का धंधा’ बता रही है, जैसे असम में हुआ था जहां लाखों लोग फंस गए। कूचबिहार जैसे बॉर्डर इलाकों में बांग्लादेश से आए शरणार्थी बहुत हैं, वहां लोग डर के मारे कांप रहे। BLO यानी बूथ लेवल अधिकारी – ये गरीब वॉलंटियर – तो सबसे ज्यादा परेशान। धमकियां, मारपीट, थकान – सब झेल रहे।
बात तो और बुरी हो गई जब मौतें शुरू हुईं। बंगाल में ही 40 अफसर SIR ड्यूटी पर मर चुके। ममता कहती हैं, जल्दबाजी से डर और थकान ने ये किया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, छह राज्यों में 33 BLO ने सुसाइड कर लिया। रॉय का डिटेंशन कैंप वाला डर असम की याद दिला रहा, और CAA से सख्त चेकिंग का शक पैदा कर रहा।
बीजेपी फंस गई: चुप्पी साधे या दूरी बनाए?
रॉय की ये बगावत बीजेपी के गले की हड्डी बन गई। पार्टी CAA को माटुआ वालों के लिए तोहफा बता रही थी, अब अपना ही सांसद उसी पर हमलावर। राज्य अध्यक्ष सुकांता मजुमदार ने कहा, “पता नहीं क्या बोला, लेकिन SIR से डिटेंशन कैंप का कोई लेना-देना नहीं।” राष्ट्रीय नेताओं पर कीचड़ से बच गईं।
अभी तक रॉय पर कोई एक्शन नहीं। एक्स पर बीजेपी वाले भी परेशान दिखे – इसे ‘अपने घर का झगड़ा’ बता रहे। रॉय पहले भी पार्टी से भिड़ चुके। 2024 में CAA में देरी पर ‘धोखा’ बोला था। माटुआ वोटों से बीजेपी को 18 लोकसभा सीटें मिली थीं, अब वो ही फंस सकती हैं।
टीएमसी ने लपका मौका: ‘वोट चोरी की साजिश’
टीएमसी ने फौरन हमला बोला। कुणाल घोष ने कहा, “बीजेपी SIR से टीएमसी इलाकों के वोट काट रही। नाम हटाकर चुनाव जीतने का प्लान!” अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर चिल्लाया, “देश में 50 मौतें SIR की जल्दबाजी से। ECI बीजेपी की कठपुतली बनी। बंगाल भूलेगा नहीं!” पार्टी ने ECI से शिकायत की – BLO मौतों पर जवाब दो, नाम न काटो मनमाने।
आगे क्या? बंगाल में आग लगने को तैयार
2026 चुनाव नजदीक हैं, रॉय का ये बयान बीजेपी की चूलें हिला रहा। 2019 में हिंदू वोटों से उछाल आया था, अब सांप्रदायिक झगड़े के इल्जाम लग रहे। माटुआ लोग नाराज हो सकते, टीएमसी को ‘बंगाली-विरोधी’ का हथियार मिल गया।
कानूनी तौर पर ये राजद्रोह या बदनामी का केस बन सकता, लेकिन अभी चुप्पी। कूचबिहार की गलियों में डर फैला, माटुआ लीडर शांति कह रहे लेकिन SIR तेज हुआ तो सड़क पर उतरेंगे।
साल खत्म हो रहा, ये घटना बता रही – वोट की लिस्ट साफ करने का खेल पहचान और सत्ता की जंग बन जाता। बीजेपी फंस गई – रॉय को दंड दो तो वोटर भागेंगे, चुप रहो तो पाखंडी कहलाओगे। एक्स पर कोई बोला, “ये घर का विद्रोह ही पार्टी का कब्र खोद रहा।”

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