आयुष गुप्ता संवाददाता कानपुर: भारतीय गणराज्य की सबसे निर्णायक ताकत उसकी युवा आबादी में है। 18 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के करोड़ों युवा वोटर आज चुनावी नतीजों का सबसे बड़ा, सबसे प्रभावशाली तथा सबसे परिवर्तनकारी फैक्टर बन चुके हैं। जेन-जी की यह नई, ऊर्जावान, जागरूक तथा महत्वाकांक्षी पीढ़ी पुरानी राजनीतिक भाषा, पुरानी शैली, पुरानी रणनीतियों तथा पुरानी सोच से पूरी तरह अलग, दूर और कहीं न कहीं असहमत है।
ये युवा बड़े-बड़े वादों, जोशीली नारेबाजी, भावनात्मक अपीलों या परंपरागत भाषणों से प्रभावित नहीं होते। ये तर्क, आंकड़े, स्पष्ट कार्ययोजना, ठोस नीतियां, व्यावहारिक समाधान तथा पूर्ण प्रामाणिकता चाहते हैं। ये युवा सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रिय हैं, झूठी खबरों तथा गलत जानकारी को तुरंत पकड़ लेते हैं तथा किसी भी तरह के बनावटीपन, दिखावे या असत्य से दूर भागते हैं। इसलिए, इन युवा वोटरों को जीतना आसान नहीं है, लेकिन सही, आधुनिक, डेटा-आधारित तथा युवा-उन्मुख रणनीति अपनाकर ये सबसे वफादार, सबसे बड़े, सबसे प्रभावशाली तथा सबसे दीर्घकालिक वोट बैंक बन सकते हैं।
मेरा मानना है कि जेन-जी को जीतने के कुछ ख़ास मंत्र हैं, जिसमें इनकी भाषा में बात करना, इनके मुद्दों पर गहराई से फोकस करना, इनके सपनों और आकांक्षाओं से जुड़ना तथा हर कदम पर प्रामाणिक, पारदर्शी व जवाबदेह बने रहना शामिल है। ये युवा वोटर भावनाओं से कम और तर्क, आंकड़ों, व्यावहारिक समाधान तथा रीयल एक्शन से ज्यादा प्रभावित होते हैं। यदि आप इनकी आकांक्षाओं, इनकी चुनौतियों, इनकी दुनिया तथा इनकी सोच को गहराई से समझकर सही, एडवांस तथा इनोवेटिव रणनीति अपनाते हैं, तो ये न केवल चुनाव जीताएंगे, बल्कि आने वाले दशकों के लिए मजबूत, स्थायी, दीर्घकालिक तथा अटूट आधार बनाएंगे। मैं तो यह भी कहूंगा कि जेन-जी भारत का भविष्य हैं और जिसने इनको जीत लिया, उसने चुनाव नहीं, पूरा देश तथा आने वाली पीढ़ियां जीत लीं।भारत में युवा वोटरों की संख्या लगातार तथा तेज गति से बढ़ रही है।
सोशल मीडिया इनकी दूसरी भाषा, इनका मुख्य संवाद माध्यम तथा इनकी रोजमर्रा की दुनिया का अभिन्न हिस्सा है। ये ट्रेडिशनल टीवी न्यूज, अखबार या लंबे भाषण कम देखते-सुनते हैं और ऑनलाइन सामग्री, पॉडकास्ट, छोटे वीडियो, इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स तथा युवा प्रभावशाली लोगों से प्रभावित होते हैं। वहीं इनकी राजनीतिक भाषा छोटी, तेज, दृश्य आधारित और हल्के हास्य से भरी है। लंबे भाषण, पुरानी नारेबाजी या भावनात्मक अपील इन पर कोई असर नहीं डालती।
ये सवाल पूछते हैं, ठोस तथा स्पष्ट जवाब मांगते हैं और अगर जवाब संतोषजनक नहीं तो तुरंत दूसरी ओर मुड़ जाते हैं। इसलिए, युवा वोटरों को जीतने की रणनीति भी पूरी तरह नई, डिजिटल-आधारित, मुद्दा-आधारित, युवा-उन्मुख तथा निरंतर बदलती रहनी चाहिए।





