
पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए चलेगा विशेष अभियान, जल गंगा संवर्धन अभियान की तैयारियों की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा।
देवरी/सागर।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित एवं संरक्षित करने के लिए वृहद स्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण को जनभागीदारी के साथ अभियान के रूप में चलाया जाए, ताकि आने वाले समय में जल संकट की समस्या से बचा जा सके।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 की तैयारियों की समीक्षा के लिए आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में दिए।
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल सहित प्रदेश के सभी संभागायुक्त, कलेक्टर और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लगातार तीसरे वर्ष जल संचयन के कार्य कर रही है। पहले चरण में करीब 2.29 लाख जल संरचनाओं का निर्माण और विकास किया गया है।
साथ ही प्राचीन जल संरचनाओं की जल क्षमता बढ़ाकर उन्हें सुरक्षित रखने का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की नदियों से न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी लाभ मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बावड़ी, कुएं, तालाब और नहरों के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में इस अभियान को गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंचाकर सफल बनाएं।
उन्होंने बताया कि यह अभियान गंगा दशमी से वर्षा ऋतु तक चलाया जाएगा।वहीं केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और अभी भी कई संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने “खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में” अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया, ताकि भूजल स्तर बढ़ सके और कुओं व बोरवेल में पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके।मंत्री श्री पाटिल ने बताया कि मध्यप्रदेश में 250 से अधिक नदियां और कई बड़े बांध हैं, जिससे प्रदेश जल संरक्षण की दिशा में समृद्ध है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में जल संरक्षण और विकास के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं और जनता की भागीदारी से ही ऐसे अभियान सफल बनते हैं।
Mp जनक्रांति न्यूज़ सागर से
सोनू प्रजापति की रिपोर्ट