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‘मैडम, कोई नौकरी हो तो बताना…’ रैपिडो राइडर की डिग्री सुन लड़की रह गई हैरान, वायरल हुई बेरोजगारी की कहानी

On: February 21, 2026 3:57 PM
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नई दिल्ली। “बेटा पढ़-लिख लो, जिंदगी सेट हो जाएगी।” बचपन से सुनी जाने वाली यही लाइन अब सोशल मीडिया पर सवालों के घेरे में है। वजह है एक रैपिडो राइडर की वायरल कहानी, जिसने अपनी क्वालिफिकेशन बताकर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

काम से लौट रही एक युवती ने रैपिडो बुक की थी। रास्ते में राइडर ने अचानक पूछा, “मैडम, अगर कहीं नौकरी हो तो बताना…”। बात यहीं खत्म नहीं हुई। जब लड़की ने उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा, तो जवाब सुनकर वह सन्न रह गई।

मैथ्स में मास्टर्स, B.Ed भी… फिर भी सड़क पर बाइक

X (पूर्व ट्विटर) पर साक्षी नाम की यूजर ने 19 फरवरी को यह अनुभव साझा किया। उनके मुताबिक, राइडर ने बताया कि उसने गणित में बैचलर और मास्टर्स किया है। इसके बाद B.Ed भी किया। सरकारी शिक्षक बनने के लिए 5-6 साल तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की।

लेकिन स्थायी नौकरी नहीं मिली। अब रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए रैपिडो चला रहा है।

पोस्ट में साक्षी ने लिखा, “हम हमेशा कहते हैं पढ़ाई करो, डिग्रियां लो, लाइफ स्टेबल हो जाएगी। लेकिन जब कोई सब कुछ सही करता है और फिर भी उसके पास सिक्योर जॉब नहीं होती, तब क्या?”

16 करोड़ कमाने वाला भी बेरोजगार!

यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई। लाखों व्यूज और हजारों लाइक्स के साथ कमेंट सेक्शन में लोगों ने अपनी-अपनी कहानी साझा की।

एक यूजर ने लिखा, “मैंने 6 साल मार्केटिंग एजेंसी चलाई। 16 करोड़ का रेवेन्यू बनाया। लेकिन नए क्लाइंट्स न मिलने से कंपनी बंद करनी पड़ी। 9 महीने से बेरोजगार हूं, पिछले हफ्ते से ब्लिंकिट पिकर का काम शुरू किया है।”

कई लोगों ने इसे “हाईली एजुकेटेड बेरोजगारी” का उदाहरण बताया।

डिग्री बनाम स्किल की बहस

कमेंट सेक्शन में ‘डिग्री वर्सेज स्किल’ की बहस भी छिड़ गई।
एक यूजर ने लिखा, “हमारा एजुकेशन सिस्टम लोगों को यह नहीं सिखा पाया कि पढ़ाई का मकसद स्किल्स विकसित करना है, सिर्फ डिग्री लेना नहीं।”

वहीं एक अन्य यूजर ने राइडर की मदद की पेशकश करते हुए लिखा, “अगर उसे सच में मैथ्स आती है, तो मैं एक हफ्ते में जॉब दिलवा सकता हूं।”

बड़ा सवाल

क्या सिर्फ डिग्री होना आज के दौर में काफी है?
या सिस्टम में कहीं ऐसा गैप है, जहां पढ़े-लिखे लोग भी अस्थायी काम करने को मजबूर हैं?

रैपिडो राइडर की यह कहानी सिर्फ एक शख्स की नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं की है जो पढ़ाई के बाद भी स्थिर रोजगार की तलाश में हैं।

(नोट: यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है।)

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