
केसली: सागर।
रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किए जाने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। स्थानीय किसानों ने इसे वर्तमान उत्पादन लागत की तुलना में अपर्याप्त बताते हुए MSP को 3000 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग उठाई है।किसानों का कहना है कि खाद, बीज, डीजल, सिंचाई और मजदूरी की बढ़ती लागत के बीच 2585 रुपये का समर्थन मूल्य लाभकारी नहीं है। उनका तर्क है कि यदि बाजार मूल्य भी MSP के आसपास या उससे नीचे रहता है, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।इस मुद्दे को लेकर भारतीय शक्ति चेतना पार्टी (BSCP) के कार्यकर्ता और किसान मोर्चा के प्रतिनिधि एसडीएम कार्यालय पहुंचे और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि केंद्र द्वारा घोषित MSP पर राज्य सरकार अतिरिक्त बोनस देने या मूल्य पुनर्विचार के लिए केंद्र से आग्रह करे, ताकि किसानों को राहत मिल सके।

प्रशासनिक स्तर पर भी किसानों ने पंजीकरण अवधि 7 फरवरी से 7 मार्च तक सीमित रखने पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि तकनीकी समस्याओं, सर्वर संबंधी दिक्कतों और ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव के कारण कई छोटे एवं सीमांत किसान समय पर पंजीकरण नहीं करा पाते। इसलिए पंजीकरण अवधि में कम से कम 15 दिन की वृद्धि की मांग की गई है।किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। फिलहाल प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर संबंधित स्तर पर भेजने की बात कही है। अब देखना यह है कि राज्य और केंद्र सरकार किसानों की इन मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं।
Mp जनक्रांति न्यूज़ केसली सागर से
संवाददाता सोनू प्रजापति की रिपोर्ट
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