नई दिल्ली | न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने प्रमुख समाचार चैनल ज़ी न्यूज़ (Zee News) पर 1 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई एक भ्रामक और सांप्रदायिक रंग देने वाली रिपोर्ट के प्रसारण के कारण की गई है, जिसमें दावा किया गया था कि एक मुस्लिम ड्राइवर ने नमाज़ पढ़ने के लिए नेशनल हाईवे को जाम कर दिया था।
क्या था पूरा मामला?
बीते 4 मार्च 2025 को ज़ी न्यूज़ ने अपने प्राइमटाइम शो में एक वीडियो दिखाया था। इस रिपोर्ट का शीर्षक था— “ट्रक पर नमाज़, हाईवे किया जाम”। चैनल ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के रामबन इलाके में एक ड्राइवर ने सड़क के बीचों-बीच ट्रक खड़ा कर उसकी छत पर नमाज़ पढ़ी, जिससे श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर लंबी कतारें लग गईं। एंकर ने इस दौरान तीखी टिप्पणियां कीं और घटना को पूरी तरह से सांप्रदायिक चश्मे से पेश किया।
फैक्ट-चेक में खुली पोल
प्रसारण के तुरंत बाद फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म ‘अल्ट न्यूज़’ और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस दावे की सच्चाई उजागर की। जांच में सामने आया कि:
- हाईवे पर जाम नमाज़ की वजह से नहीं, बल्कि खराब मौसम और भूस्खलन (Landslides) के कारण लगा था।
- हजारों वाहन घंटों से फंसे थे, जिसमें वह ट्रक ड्राइवर भी शामिल था।
- रमज़ान का महीना होने के कारण, फंसे हुए समय का उपयोग करते हुए ड्राइवर ने अपनी गाड़ी की छत पर नमाज़ अदा की थी।
- नमाज़ का ट्रैफिक जाम से कोई संबंध नहीं था।
NBDSA का सख्त रुख और फैसला
इंद्रजीत घोरपड़े और अन्य शिकायतकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए NBDSA ने 17 फरवरी 2026 को अपना फैसला सुनाया। अथॉरिटी ने कहा कि:
“सोशल मीडिया से बिना सत्यापन (Verification) के वीडियो उठाना और उसे बिना जांचे प्रसारित करना पत्रकारिता के मानकों का गंभीर उल्लंघन है। यह कंटेंट भ्रामक और सटीकता के सिद्धांत के खिलाफ था।”
चैनल को 1 लाख रुपये जुर्माना भरने के साथ ही भविष्य के लिए 6 नए दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं, ताकि सोशल मीडिया कंटेंट के इस्तेमाल में सावधानी बरती जा सके।
ज़ी न्यूज़ और विवादों का पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब ज़ी न्यूज़ पर इस तरह के आरोप लगे हैं। 2026 में ही एक ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़ी गलत रिपोर्टिंग के लिए चैनल पर 2 लाख का जुर्माना लग चुका है। इसके अलावा:
- जेएनयू विवाद (2016): कन्हैया कुमार मामले में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारों वाले वीडियो को फॉरेंसिक रिपोर्ट में छेड़छाड़ किया हुआ पाया गया था।
- जिहाद सीरीज: अल्पसंख्यकों के खिलाफ एक तरफा और पूर्वाग्रह से ग्रसित सीरीज चलाने पर भी चैनल की कड़ी आलोचना हुई थी।
पत्रकारिता में ‘सत्यापन’ सबसे बड़ा धर्म है। ज़ी न्यूज़ पर हुई यह कार्रवाई अन्य मीडिया संस्थानों के लिए एक सबक है कि सोशल मीडिया की भीड़ में बिना तथ्य जांचे खबर चलाना न केवल कानूनन गलत है, बल्कि समाज के सौहार्द के लिए भी खतरनाक है।