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गरीबों की ‘रसोई’ पर अफसरों का ‘पहरा’? इंदौर नगर निगम के टेंडर में बड़े ‘खेल’ के आरोप, लोकायुक्त तक पहुंची बात!

On: June 25, 2026 9:08 PM
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इंदौर: दीनदयाल रसोई योजना के टेंडर में ‘खेल’ के आरोप; मंत्री और लोकायुक्त से हुई शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग

इंदौर। इंदौर नगर पालिक निगम द्वारा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए चलाई जा रही ‘दीनदयाल रसोई योजना’ (DDRY) एक बार फिर चर्चा में है। इस योजना के टेंडर आवंटन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की शिकायत मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर महापौर, लोकायुक्त कार्यालय और नगर निगम आयुक्त से की गई है

शिकायतकर्ता अरविंद तिवारी ने टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितता, चहेती संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में तकनीकी हेरफेर और वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत पत्र में वर्तमान टेंडर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है

बार-बार टेंडर जारी करने और निरस्त करने पर उठे सवाल

शिकायत पत्र के अनुसार, दीनदयाल रसोई योजना (तृतीय चरण – गाड़गे अड्डा रसोई केंद्र) के लिए पहली बार अक्टूबर 2023 में ई-निविदा (NIT No. 103) जारी की गई थी। इसके बाद सितंबर 2024 में दोबारा निविदा निकाली गई और हाल ही में 12 मार्च 2026 को एक बार फिर नए सिरे से टेंडर (Tender ID: 2026_UAD_489722_1) जारी किया गया

शिकायतकर्ता का विधिक आरोप है कि वर्ष 2023 और 2024 में निविदाएं आमंत्रित करने के बावजूद बिना किसी ठोस कारण के उन्हें निरस्त कर दिया गया। आरोप लगाया गया है कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि शर्तें अधिकारियों की पसंदीदा पुरानी संस्थाओं के अनुकूल नहीं थीं, और टेंडर निरस्त रखकर पुरानी संस्थाओं से ही लगातार काम कराया जाता रहा, जो नियमों का उल्लंघन है

तकनीकी मूल्यांकन (Technical Evaluation) के नियमों पर आपत्ति

दस्तावेजों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 के नए टेंडर में तकनीकी मूल्यांकन के लिए तय किए गए 100 अंकों के विभाजन को लेकर मुख्य आपत्ति दर्ज कराई गई है:

  • अनुभव के अंकों में पक्षपात का आरोप: निविदा की शर्तों में समान कार्य के अनुभव के लिए 20 अंक रखे गए हैं, जिसमें से 10 अंक विशेष रूप से ‘दीनदयाल रसोई योजना का कार्य अनुभव’ होने पर ही दिए जाने का प्रावधान है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह सीधे तौर पर पहले से काम कर रही चुनिंदा संस्थाओं को लाभ पहुंचाने की कोशिश है।
  • जिले में 5 साल के अनुभव की बाध्यता: ‘जिले में संचालित अन्य गतिविधियां’ श्रेणी के तहत 20 अंक केवल उन संस्थाओं को देने का नियम है, जिन्हें इंदौर जिले में पिछले 5 वर्षों का अनुभव हो, जिससे नई और योग्य संस्थाएं रेस से बाहर हो जाएं।
  • महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को बाहर करने का दावा: शासन के महिला आत्मनिर्भरता के संकल्प के विपरीत, टेंडर में संस्था के लिए न्यूनतम 25 लाख रुपये प्रति वर्ष का टर्नओवर और पिछले 5 वर्षों की सी.ए. ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य की गई है। शिकायत में कहा गया है कि इंदौर में करीब 5,000 पंजीकृत स्व-सहायता समूह हैं, लेकिन किसी भी गरीब महिला समूह के पास इतना बड़ा वित्तीय टर्नओवर नहीं होता, जिससे वे प्रक्रिया से स्वतः ही बाहर हो गए हैं।
  • जिला समिति के विवेक पर 10 अंक: स्वच्छता और संचालन के नाम पर रखे गए 10 अंकों को जिला समिति के मूल्यांकन पर छोड़ दिया गया है, जिसे शिकायतकर्ता ने अत्यधिक सब्जेक्टिव (व्यक्तिपरक) बताया है।
  • लॉटरी प्रक्रिया पर संशय: समान अंक मिलने पर चयन के लिए रखी गई ‘लॉटरी प्रक्रिया’ की शर्त पर भी सवाल उठाए गए हैं कि जब पूरा चयन अंकों के आधार पर हो रहा है, तो इसमें लॉटरी का प्रावधान क्यों रखा गया है समूह का आरोप है कि पसंदीदा संस्था के पिछड़ने पर इस नियम का दुरुपयोग किया जा सकता है।

‘घोस्ट बेनेफिशियरी’ और राशन-गैस स्टॉक की जांच की मांग

शिकायत पत्र में केवल टेंडर ही नहीं, बल्कि योजना के संचालन में भी वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका जताई गई है। आरोप है कि रसोई केंद्रों में प्रतिदिन भोजन करने वाले लोगों की संख्या (लाभार्थी) को कागजों पर बढ़ा-चढ़ाकर (Ghost Beneficiaries) दिखाया जाता है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि लाभार्थियों की सूची का उनके मोबाइल नंबरों के जरिए भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए, साथ ही वर्ष 2020 से 2025 तक की अनुबंधित संस्थाओं के कार्य आदेश, गैस सिलेंडरों के बिल और सरकारी राशन के स्टॉक रजिस्टर की सघन सूक्ष्म जांच (Micro-level probe) की जाए

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की प्रार्थना

शिकायतकर्ता अरविंद तिवारी ने आवेदन के साथ टेंडर नियमों की प्रतियां और मूल्यांकन अंक तालिका (Annexure-D/E) जैसे साक्ष्य भी संलग्न किए हैं। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान टेंडर प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाते हुए पूरे मामले की ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ एवं अन्य सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए

(नोट: इस पूरे मामले में न्यूज़ पोर्टल किसी भी आरोप की पुष्टि स्वयं नहीं करता है, यह पूरी खबर सक्षम अधिकारियों को सौंपे गए शिकायत पत्र और उसमें संलग्न विधिक दस्तावेजों पर आधारित है।)

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